मौसम नौवीं क्लास की लड़की जैसा था


मैंने नदी का हाथ पकड़ के जिंदगी को देखा
तुमने रेलवे स्टेशन पे बैठकर
नशा आँखों में था या बातों में
ठीक से याद नहीं
अंधेरा तेरे गाल के कुए जितना था
(जहाँ मैंने कपडे धोए अक्सर और पलकों पे सुखाये)
और मौसम नौवीं क्लास की लड़की जैसा
आगे याद नहीं या मैं बताना नहीं चाहता