उधार

१. रोज पीता हूँ बस जेब खाली होने तक
उधार की तो कभी टॉफियाँ भी नहीं खाई थी.

२. फेसबुक पोस्ट पे लाइक न आने के गम में भी पी लेता हूँ 
घाव की गहराई के अनुपात में ग़मजदा होना नहीं सीखा।

 

फेसबुक के ग्रुप फ़ोटो पर आये लाइक की कच्ची खुशी

अनाज कमाने घरों से भागे हम
अशर्फियाँ पाकर भी वापस क्यूँ नही लौट पा रहे
ये कहो ना प्यार है वाले टाइम कि बात थी
रहने वाले अपने मकान और न रहने वाले दूसरे के मकान के बीच
80 किलोमीटर लम्बी GT रोड
और चार पांच नजरें ना मिला सकने वाले मोड़
फ्रिज भी कब तक हमें बासी होने से बचाएगा
जी सिनेमा वहाँ भी आता है
और धूम 3 भी
इन कमरों में, जिनकी छतें भी रोने के आकर की बनायीं गयी हैं
एक बाल्टी पानी, 2 घंटे जिन्दा बचे रहने का हौसला देता है


यहाँ कुँआ होता तो तकलीफ़ थोड़ी कम होती
फेसबुक के ग्रुप फ़ोटो पर आये लाइक की कच्ची खुशी
या दिव्या भारती की सुपरहिट पिक्चर
फ़ैसला हमारे हाथों में हैं


एजाज़ पेंटर

अभी तुम इतने अच्छे दोस्त नहीं हुए
कि अँधेरे में तुम्हे फटा नोट ना पकड़ा सकूँ
बारिश भी हर बार हुई
और मैं हर बार हंसा गोविंदा वाली हंसी
फूट फूट कर
नंगे पैर, रेगिस्तान, ऊपर धुप
और क्या चाहिए जिन्दा रहने के लिए
शहर में शनिवार है
एजाज़ पेंटर से एक किलो "प्यार" ले आओ
कल दुकानें बंद रहेंगी
मैं शहद भरी कवितायेँ नहीं लिखता (अब)
अपना गुड साथ लेके आना

मौसम नौवीं क्लास की लड़की जैसा था


मैंने नदी का हाथ पकड़ के जिंदगी को देखा
तुमने रेलवे स्टेशन पे बैठकर
नशा आँखों में था या बातों में
ठीक से याद नहीं
अंधेरा तेरे गाल के कुए जितना था
(जहाँ मैंने कपडे धोए अक्सर और पलकों पे सुखाये)
और मौसम नौवीं क्लास की लड़की जैसा
आगे याद नहीं या मैं बताना नहीं चाहता

जिंदगी चावल का पानी है

तुमने जुखाम को इन्फ्लुएंजा कहना शुरू किया तो यकीन हुआ
की जिंदगी इतनी आसान नहीं है जितनी किताबों में लिखी थी।

ठंड इतनी थी की नदी भी पेड़ हो गयी थी
पर मै फिर भी बहा पत्तों की तरह

यह  उसी तरह था जैसे आखिरी महीने की तन्खवा छूट जाने का डर
नयी नोकरी की ख़ुशी में दब जाता है

302 केवल धारा नहीं होती
कभी घर आओ मेरे

तुम्हारी गर्दन पे क्या है दिखाना
कानों से सूंघते लोगो की कहानी सुनी है कभी

जिंदगी चावल का पानी है
पि लो या डूब जाओ

 

मेरे हिस्से की रौशनी

मैंने पानी बोया और आग काटी
और फिर हम नमकीन पर्वत पर चढ़े (वहां नदी भी थी घटनाओं की)
ताकि गलत और बहुत गलत में अंतर साफ़ दिखाई दे
और कुछ समय कागजों में बंद किया जा सके
जब सर से लोहा रिसा तो केवल मैंने देखा
ग से गमले थे जिनमे फूल बताये गये।
कई से पुछा मैंने वो रास्ता और सब ने गलत बताया


पीछे दलदल था, और कंकर
 आगे खुली हवा है और थोड़ी रौशनी(मेरे हिस्से की) ।

बर्गर, पिज्जा etc

तुमको बर्गर पसंद था और मुझे पिज्जा
लेकिन हमने नेहा फोटो स्टूडियो के सामने 12 वाला चावमीन खाया
और 3 वाली चाय, 21 रूपये मैंने दिए
बहुत गर्मी थी और मेरा फ़ोन चोरी हो गया था पर मै रोया नहीं
मंगलवार था और तेज हवा चल रही थी
एक और बात है जो मुझे जीने नहीं देती