कायर से शायर बनो केवल ७ दिनों में

दोस्तों ....... हम सब के दिलो में एक आरजू हमेशा रहती है
की हम किस तरह से अपने दिल के जज्बात "उन" तक पहुंचाएं
इसका सबसे आसान तरीका है शायर बन के.
पर क्या ये इतना आसान है?
जी हाँ मै लाया हूँ आपके लिए एक बहुत ही नायाब और आसान तरीका.

बहुत आसान है
बस केवल 10-20 शब्द हैं .. जैसे ..
आम शब्द:
महफिल, नगमा, आरजू, कसीस, उम्मीद, दामन, आशुं, तन्हाई, मदहोशी, खामोशी,
ख्वाब, शख्स, क़यामत, धड़कन, ज़माना, अल्फाज, तमन्ना, {सनम बेवफा}*, {खुदा गवाह}*
*(सनम और बेवफा एक साथ तो तो क्या कहने, खुदा गवाह पे भी यही चीज लागु होती है)

शरीर के अंग:
दिल, जिगर, आँखे, पलक, बाहें, जिस्म, सीना, रूह.

एसे शब्द जिनके बीच में या आए:
शेर-ओ-शायरी, महवे-ऐ-मदहोश, मंदर-ऐ-तामीर, सज़ा-ऐ-मौत, दर्द-ऐ-दिल.

(इनमे रोज ५-५ शब्द जोड़ते रहे)

बस हो गया इनमे से कोई भी शब्द उठाएं और शुरु कर दें.
बस इतना धयान रखे की लाइन के आखिरी शब्द लय में हों...
जैसे
१. अगर पहली लाइन में आखिरी शब्द मेले हैं तो दूसरी लाइन में अकेले, केले, या फिर झमेले होना चाहिए.
अगर पहली लाइन में आखिरी शब्द खामोशी हो तो दूसरी, तीसरी, और चोथी लाइन में मदहोशी, बेहोशी , सरगोशी होगा.

अब दिल, जिगर, आँखे, पलके, और, सपने का परयोग करके हम इसे एसे बना सकते हैं

१ . दिल की आँखों से जिगर के पार देखा नही जाता
पलकों के सपनो को डस्टबिन में फेंका नही जाता

२ . दिल बेचने कहाँ जाओगे दिलो के मेले नही लगते
आम के पेड़ पे कभी केले नही लगते

३ . उनकी सोचो जो इस दिल में रहते है
तुम्हारे सुख दुःख रात दिन सहते हैं
और वीक एंड पे बस यही कहते हैं
आपके आसूओ में केवल हम बहते हैं .

४. चलते चलते तुम मेरे ये जीत याद रखना
केले के छिलके पे तुम पैर किसी के रखने के बाद रखना.

५. जहाँ लहरों की खामोशी हो,
जहाँ साँसों की मदहोशी हो,
जहाँ जज्बों की बेहोशी हो,
जहाँ आंखों से सरगोशी हो,
(वहा से चुपके से निकल जाने में ही भलाई है).

बस एसी तरह से कोशिस करते रहिये एक दिन सफलता आपके कदम चूमेगी

आज के लिए इतना ही... चलता हूँ

रेडियो में गाना बज रहा है
एक तू ना मिला सारी दुनिया मिले भी तो क्या है
उसको क्या पता की
छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए ये मुनासिब नही आदमी के लिए

10 comments:

venus kesari said...

प्यार से भी जरुरी कई काम है
प्यार सब कुछ नही जिन्दगी के लिए

अच्छी तरकीब बताई आपने

अब हम इससे भी सरल तरकीब बताते है

www.subeerin.blogspot.com
पर जाइये सारी पोस्ट पढिये मेहनत करिए और एक उम्दा गज़लकार बनिए

venus kesari

शोभा said...

वाह क्या स्टाइल है. ये तो खूब रही. स्वागत है आपका

Shastri said...

वाह, आज ही कोशिश करते हैं!!

हिन्दी चिट्ठाजगत में इस नये चिट्ठे का एवं चिट्ठाकार का हार्दिक स्वागत है.

मेरी कामना है कि यह नया कदम जो आपने उठाया है वह एक बहुत दीर्घ, सफल, एवं आसमान को छूने वाली यात्रा निकले. यह भी मेरी कामना है कि आपके चिट्ठे द्वारा बहुत लोगों को प्रोत्साहन एवं प्रेरणा मिल सके.

हिन्दी चिट्ठाजगत एक स्नेही परिवार है एवं आपको चिट्ठाकारी में किसी भी तरह की मदद की जरूरत पडे तो बहुत से लोग आपकी मदद के लिये तत्पर मिलेंगे.

शुभाशिष !

-- शास्त्री (www.Sarathi.info)

Udan Tashtari said...

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.

हरि said...

शुभकामनाएं।

श्यामल सुमन said...

हास्य का अंदाज अच्छा लगा। बधाई। लिखते रहें। शुभकामनाएँ।

वैसे गीत गजल लिखना कम से कम इतना आसान नहीं, जैसा आपने बताया है।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.

संतोष अग्रवाल said...

बहुत अच्छे! चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक स्वागत है. कृपया निरंतरता बनाये रखे.

प्रदीप मानोरिया said...

चिठ्ठा जगत में आपका बहुत स्वागत है मेरे ब्लॉग पर पधार कर कविताओं का आनंद लें पसंद आयें तो टिपियायें

PD said...

सबरे सबेरे खूब हंसा हूँ..
क्या लिखा है..
दिल बेचने कहाँ जाओगे दिलो के मेले नही लगते
आम के पेड़ पे कभी केले नही लगते

मस्त.. :)

रचना गौड़ ’भारती’ said...

बहुत अच्छा लिखा है