बस

तेरे शहर जाने वाली बस के पीछे लिखा था-
"ओके टाटा फिर मिलेंगे"
मैंने पूछा कब?
पर वो बस थी
कैसे कहती की कभी नहीं।

8 comments:

neha said...

good one.........
thanks for liking my blog....

Harkirat Haqeer said...

प्रशांत जी किधर गायब थे इतने दिन .....!?!

पर वो बस थी
कैसे कहती की कभी नहीं।

गजब....!!!!

awaz do humko said...

good

संदीप शर्मा said...

:)

neelima sukhija arora said...

bahut dukhi lagte hain, aisa kyun

adwet said...

bahut khoob. achha likha

ताऊ रामपुरिया said...

इष्ट मित्रों एवम कुटुंब जनों सहित आपको दशहरे की घणी रामराम.

Pankaj Upadhyay said...

:) :)